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कार्यशील पूँजी

केवल परियोजना पूरा होने के करीब होने पर और यह सुनिश्चित करने के बाद कि उधारकर्ता को सावधि ऋण प्राप्त हो गया है, कार्यशील पूंजी सीमा पर विचार किया जा सकता है.  ये सीमाएं सावधि ऋण या चल खाता और / या बिल वित्तपोषण सुविधा के रूप में होंगी.  इस श्रेणी के अंतर्गत प्रदत्त वित्त,  इकाई के रोज़मर्रा के परिचालनों के लिए धन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए होगा, अर्थात कच्चा माल प्राप्त करने, उत्पादों से संबन्धित विभिन्न व्ययों, कच्चे माल को तैयार माल में परिवर्तित करने, विपणन और प्रशासनिक व्ययों आदि के लिए होगा.

बड़े उधारकर्ताओं को कार्यशील पूंजी के संबंध में बैंक ऋण वितरण की ऋण प्रणाली पर भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुरूप बैंकिंग प्रणाली से रु.10 करोड़ और अधिक की कुल कार्यशील पूंजी सीमा का लाभ उठा रहे उधारकर्ताओं को इसे 60:40 अनुपात में सावधि ऋण (कार्यशील पूंजी मांग ऋण) और नकद ऋण (चल खाता) के रूप में दिया जाएगा.   कार्यशील पूंजी मांग ऋण सुविधा 7 दिनों की न्यूनतम निर्धारित अवधि के लिए संबन्धित उधारकर्ता के द्वारा रोल ओवर के विकल्प के साथ प्रदान की जाएगी.

उधारकर्ता के प्रकार, बैंकिंग प्रणाली से प्राप्त कुल कार्यशील पूंजी सुविधा, परिचालन का मान, गतिविधि/उद्यम की प्रकृति और उत्पादन चक्र की अवधि/लंबाई आदि के आधार पर पात्र कार्यशील पूंजी सीमा की गणना विभिन्न पद्धतियों जैसे प्रक्षेपित पण्यावर्त पद्धति, अनुमत बैंक वित्त पद्धति, नकद बजट पद्धति और निवल स्वामित्व निधि पद्धति का पालन करके की जाएगी.

बैंक के सामान्य ऋण मानदंड और वैयक्तिक उधारकर्ता खातों के संबंध में जोखिम धारणा पर जो प्रतिभूति और वैयक्तिक / अन्य पक्ष की गारंटी लागू होते हैं, वैसे ही वे कार्यशील पूंजी सीमा के लिए लागू होंगे.

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