इतिहास 

कार्पोरेशन बैंक की संस्थापना 12 मार्च 1906 को केनरा बैंकिंग कार्पोरेशन (उडुपि) लिमिटेड के नाम से मंदिरों के शहर उडुपि में क्रान्तदर्शियों के एक समूह के पुरोगामी प्रयत्नों से हुई। बैंक ने अपना प्रारंभ रु.5000/- से किया तथा पहले दिन की समाप्ति पर संसाधन 38 रुपए 13 आना 2 पाई था।

लोगों की दीर्घकालिक बैंकिंग आवश्यकताओं को पूरा करने तथा बचत की आदत भी डालने के लिए प्रतिबद्ध संस्थापक अध्यक्ष खान बहादूर हाजी अब्दुल्ला हाजी कासिम साहेब बहादूर ने समाज में समृद्धि लाने वाली वित्तीय संस्था जिसकी अत्यधिक आवश्यकता थी, की संस्थापना की।

जनता को 19 फरवरी, 1906 को की गई पहली अपील में इस संस्थापना के पीछे जो उच्च आदर्श तथा दर्शन थे, उनके संबंध में विस्तार से बताया गया है। संस्थापक अध्यक्ष हाजी अब्दुल्ला ने घोषित किया कि

“ ‘कार्पोरेशन' की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जाति या धर्म के भेद-भाव के बिना सभी श्रेणियों के लोगों में बचत की ही नहीं बल्कि सभी श्रेणियों में आपसी सहयोग की आदत डालना भी है।"

“यह शुद्ध व सरल 'स्वदेशीभावना' से ओतप्रोत है तथा प्रत्येक देशप्रेमी से इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आगे आते हुए सहयोग करने की अपेक्षा है।"

बाद के दिनों में :

प्रारंभिक संवृद्धि में जानबूझकर सावधानी बरती गई जो आवश्यकता आधारित थी। बैंक की पहली शाखा कुंदापुर में 1923 में खोली गई, तत्पश्चात् मंगलूर में 1926 में दूसरी शाखा खोली गई। बैंक ने 1934 में मडिकेरी में अपनी सातवीं शाखा खोलते हुए तत्कालीन कूर्ग राज्य में कदम रखा। बैंक को 1937 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल किया गया।

सभी के लिए समृद्धि :

1939 में बैंक का नाम केनरा बैंकिंग कार्पोरेशन (उडुपि) लिमिटेड से "केनरा बैंकिंग कार्पोरेशन लिमिटेड" में परिवर्तित किया गया तथा आदर्श वाक्य - "सर्वे जना: सुखिनो भवंतु" जिसका अर्थ है "सभी जन सुखी रहे" को अपने दर्शन के रूप में अपनाया।

बैंक के नाम में दूसरा परिवर्तन "केनरा बैंकिंग कार्पोरेशन लिमिटेड" से "कार्पोरेशन बैंक लिमिटेड" के रूप में 1972 में हुआ तथा 15 अप्रैल, 1980 को बैंक के राष्ट्रीयकरण के बाद यह “कार्पोरेशन बैंक” हो गया।

राष्ट्रीय लक्ष्यों में भागीदारी :

बैंक ने पूर्ण उत्साह से राष्ट्रीयकरण की प्राथमिकताओं का बीडा उठाया तथा अपने निष्पादन उन्मुख संस्कृति तथा लाभ वृद्धिकारी परम्परा को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय उद्देश्यों को पूरा करने में सफल हुआ है। इन सब के बीच में वर्ष 1985 में बैंक ने रु.1000 करोड़-जमा का लक्ष्य पार किया तथा 1990 के दशक से नई प्रौद्योगिकी को अपनाते हुए उच्च गुणवत्तायुक्त संवृद्धि पर ध्यान केंद्रित करना प्रारंभ किया।

भारत में बैंकिंग क्षेत्र सुधार के प्रथम चरण की समाप्ति पर बैंक आस्ति गुणवत्ता, पूँजी पर्याप्तता, परिचालनगत सक्षमता, सुविविधीकृत आय आधार, लाभप्रदता, उत्पादकता तथा सुदृढ़ तुलन पत्र में अन्य बैंकों से आगे बढ़ते हुए सार्वजनिक क्षेत्र में सबसे नवोन्मेषी तथा सक्रिय बैंक के रूप में उभरा।

सामान्य रूप से जनता तथा विशेष रूप से ग्राहकों द्वारा दर्शाए गए अपार आत्मविश्वास तथा वफ़ादारी के कारण वर्ष 1997 में बैंक के प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव को शानदार प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।

बड़ी लीग में ऊँची छलाँग :

31 मार्च 2016 को बैंक का कुल कारोबार रु.3,45,493 करोड़ था। कुल जमा रु.2,05,171 करोड़ रहे तथा कुल अग्रिम रु.1,40,322 करोड़ रहे। निवल मालियत रु.11,344 करोड़ तक पहुंची।

विस्तार के साथ निकटता :

वर्तमान में, बैंक का देश भर में 2440 पूर्णत: स्वचालित सीबीएस शाखाओं, 3040 एटीएमों तथा 4724 शाखारहित बैंकिंग इकाइयों का नेटवर्क है। दुबई तथा हाँगकाँग में बैंक के प्रतिनिधि कार्यालय हैं।

बैंक ने 4724 गाँवों में शाखारहित बैंकिंग इकाइयाँ प्रारंभ की है तथा इन गाँवों के सभी खाताधारकों को स्मार्ट कार्ड जारी किया है ताकि वे बैंक द्वारा नियुक्त कारोबार साथी (बीसी) के द्वारा अपनी दहलीज पर अपने खाते परिचालित कर सकें।

उत्साही निष्पादक :

38 रुपए 13 आना 2 पाई के कुल व्यापार से रु.3,45,493 करोड़ तथा रु.5,000 की निवल मालियत से रु.11,344 करोड़ तक, "निधि" से अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के रूप में परिवर्तन तथा स्वदेशी भावना के प्रारंभिक दिनों से उदारीकरण के बाद के इन दिनों तक की यात्रा व दो विश्व युद्धों, आर्थिक मंदियों से गुज़रते हुए अद्यतन प्रौद्योगिकी को आत्मसात कर वित्तीय सुधारों के अनुरूप कार्य निष्पादन तथा 1906 के शुभारंभ से अब तक अनवरत लाभ दर्ज करने की अनन्य परम्परा कार्पोरेट सफलता की गाथा है।

 

दो विश्वयुद्धों, आर्थिक मंदी का साहसपूर्ण सामना, नवीनतम तकनीक को अपनाना, वित्तीय सुधारों के अनुरूप अपने को ढालना और 1906 के अपने प्रारम्भ से निर्बाध रूप से लाभ अर्जित करने के विशिष्ट रिकार्ड ने केवल जनता के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को और मज़बूत किया है।